अनमोल वचन

अनमोल वचन

भय मन की ऐसी वृत्ति है, जो सभी जीवों में सूक्षम रूप से विद्यमान रहती है। अन्तर्मन में व्याप्त इस भय से हर कोई पार पाना चाहता है। मानव तो इससे छूटने के लिये सदैव प्रयत्नशील रहता है। वह इसे पास फटकने भी देना नहीं चाहता, परन्तु भय किसी न किसी रूप में मनुष्य के पीछे लगा ही रहता है। वह कई आयामों में प्रकट होता है। भय कभी भविष्य की अनिश्चितता के कारण तो कभी अभाव के कारण, कभी रात्रि के अन्धकार में अकेलेपन के कारण तो कभी बच्चों के भविष्य के कारण होता है। भय के और भी अनेक कारण होते हैं, वे भी जो परिस्थितिजन्य होते हैं। सभी भयों के अतिरिक्त सबसे अधिक पीडा देने वाला होता है मृत्यु का भय। अन्य सभी भय तो परिस्थितियों के प्रतिकूलता से उत्पन्न होते हैं और अनुकूलता पाते ही समाप्त भी हो जाते हैं, परन्तु मृत्यु का भय मनुष्य के हृदय को बैचेन कर देता है। मृत्यु के बाद क्या होगा, यह भाव उसे भय से भर देता है, किन्तु बहुधा वह उसे प्रकट नहीं होने देता। प्रकटता में निडरता का चोला ओढे रहता है, परन्तु भीतर से उसे ही पता होता है कि वह कितना भयभीत है।

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