अनमोल वचन

अनमोल वचन

आज योग दिवस है। योग का अर्थ होता है जोड। भारत में योग विद्या प्राचीन काल से ही प्रचलन में है। प्रश्न उठता है कि योग तो गणित का शब्द है, यह आध्यात्म में किस अर्थ में प्रयोग होता है। यहां भी तो जोडने का ही शास्त्र है। आत्मा को परमात्मा के साथ जोडने की विद्या ही योग है। प्राणायाम के माध्यम से अपने प्राण को अनन्त के महाप्राण से जोडना ही योग है। प्रकृति से हमारी सांस को एक लय मिली हुई है। उस लय के बिगडने से हम अस्वस्थ हो जाते हैं। योग विज्ञान में प्राण ऊर्जा को ब्रह्म ऊर्जा से पुन: प्राणायाम के द्वारा जोडा जाता है। तब फिर से मनुष्य तन-मन से स्वस्थ हो जाता है। योग शरीर पर प्रकृति से पडने वाले प्रभावों को भी नियंत्रित करता है। विज्ञान की भाषा में उस प्रभाव को आयान कहते हैं। एक ऋण आयन दूसरा धन आयन। ऋणायन की वृद्धि शरीर को स्वस्थ रखती है, जबकि धनायन के प्रभाव से शरीर रूग्ण हो जाता है। योग शरीर पर आयन के उसी नकारात्मक प्रभाव को नष्ट करता है। योग के द्वारा ही नकारात्मक विचार जैसे निराशा, तनाव, ईष्र्या, शंका आदि का नाश होता है, क्योंकि योग के द्वारा दिव्य प्राण ऊर्जा प्राप्त होती है। पृथ्वी पर प्रदूषण बढने के कारण धनायन की वृद्धि अधिक हो रही है। योग धनायन के दुष्प्रभावों को रोकने की निरोधक शक्ति पैदा करता है, इसलिए प्राणों को स्वस्थ रखने के लिये प्राणायम के विज्ञान जो योग का अंग है, के महत्व को समझा जाये।

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