अनमोल वचन

अनमोल वचन

सत्यनिष्ठा, सत्यवाणी, श्रेष्ठ संस्कार ये श्रेष्ठ मानवीय मूल्य हैं। सत्य सफलता पाने का श्रेष्ठ उपाय है। झूठ बोलना लोगों को गुमराह करना है। यह एक नकारात्मक प्रवृत्ति है। बुराई को अच्छाई बताने के लिये झूठ का प्रयोग किया जाता है। सच्चाई को छिपाने के लिये झूठ आता है। सत्य परोपकारी हैं तो झूठ परम स्वार्थी है। सत्य आदर्श और मर्यादा की लक्ष्मण रेखा नहीं लांघता। झूठ नैतिकता से रिक्त होता है। एक झूठ को सत्य सिद्ध करने के लिये सौ झूठों का सहारा लेना पडता है। यह बात अलग है कि झूठ सत्य नहीं हो पाता। झूठ कुसंस्कार और पतन का मार्ग है, क्योंकि एक बार झूठ के सहारे सफलता मिल जाये तो बार-बार झूठ बोलने की आदत पड जाती है। जानकारी का अभाव झूठ का पोषण करता है, इसलिए सत्य छिपाने वाले झूठे आश्वासनों के द्वारा सीधे सच्चे सरल व्यक्तियों को मूर्ख बनाते हैं, परन्तु झूठ की कलई एक न एक दिन अवश्य खुल जाती है। सत्य किसी की प्रार्थना, विनम्रता, क्षमा याचना और उपकार को महत्व देता है तो झूठ किसी की सरलता को उसकी विवशता मानकर मनमानी करता है। सत्य तब एक झूठ का पीछा करता है, जब तक यथार्थ सामने नहीं आ जाता, इसीलिये तो कहा गया है कि झूठ के पांव नहीं होते। जो स्वयं झूठे होते हैं, वे भी झूठों पर विश्वास नहीं करते। इसलिए झूठ का त्याग कर क्यों न सत्य को ही अंगीकार किया जाये।

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