अनमोल वचन

अनमोल वचन

जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिये व्यवहार कुशल होना अनिवार्य है। व्यवहार कुशलता जीवन जीने की कला का एक अंग है। जो इस कला में दक्ष है, वह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफल होता है, परन्तु जिसने इस कला को नहीं सीखा, जो इस कला की परिभाषा से अनभिज्ञ है, वह जीवन जीता नहीं, उसे जीवन ढोना पडता है। जन्म के समय न कोई उदंड है, न अनुशासित। शिशु तो पवित्र होता है, उसमें कोई अवगुण नहीं होता। वह न व्यवहारकुशल होता है और न उदंड। हां जब वह धीरे-धीरे बडा होने लगता है, बातों को समझने लगता है, तो सर्वप्रथम परिवार का वातावरण उसे प्रभावित करता है। उसका सबसे पहला और सबसे बडा गुरू उसकी मां होती है, इसलिए मां का व्यवहार ही उसका सबसे पहला पाठ होता है। उसके पश्चात उसकी संगति, उसके मित्रों का प्रभाव उस पर पडता है। जैसा वातावरण उसे मिलता है, उसी के अनुसार ही उसका व्यवहार होता है। व्यवहार कुशल होना सफल जीवन का एक सुगम और सुखद मार्ग है। व्यवहार कुशल जीवन में कभी असफल नहीं होता। जहां कहीं भी वह जाता है, अपने सद्व्यवहार से दूसरों को अपना बना लेता है। उनसे अपना काम निकाल लेता है। यदि आप किसी को सफल व्यक्ति मानते हैं, तो यह मानें कि वह दूसरों की अपेक्षा अधिक व्यवहारकुशल है और असफल व्यक्ति आचरण और व्यवहार से उदंड है अथवा फिर वह हीन भावना से ग्रस्त है, उसे अपनी योग्यता पर भरोसा नहीं ।

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