अनमोल वचन

अनमोल वचन

मनुष्य की पहचान उसकी बोलचाल, रहन-सहन और उसके व्यवहार से होती है। मनुष्य अच्छा है या बुरा है, उसके लिये वह कोई प्रमाण पत्र लेकर नहीं घूमता। उसका व्यवहार ही उसके चरित्र का प्रमाण पत्र है। विश्वविद्यालय की पढाई के लिये तो शैक्षिक प्रमाण पत्र चाहिए, परन्तु जीवन के प्रमाण पत्र के लिये उसका व्यवहार ही प्रमाण पत्र होता है। जो व्यक्ति व्यवहारकुशल होता है, उसके पास जीवन का सबसे बडा प्रमाण पत्र होता है। जो व्यवहारकुशल नहीं, जिसे यह पता नहीं किससे कब क्या व्यवहार करना है, छोटों से, बडों से किस प्रकार का व्यवहार होना चाहिए, वह व्यक्ति दिखता तो मनुष्य ही है, परन्तु मनुष्य है नहीं। व्यवहारकुशलता एक विज्ञान है, इस कला को अभ्यास के द्वारा सीखा जाता है। उदंड होना सरल है, उसमें कोई समस्या नहीं, उदंडता सीखने के लिये किसी को गुरू दक्षिणा भी नहीं देनी पडती, किन्तु व्यवहारकुशल होना कठिन है। मां के गर्भ से न तो कोई व्यवहारकुशल होकर आता है, न ही उदंड होकर, परन्तु उसकी प्राथमिक शिक्षा उसे घर के वातावरण से ही मिलती है, जिनके घर का वातावरण सुन्दर होता है, जिनके घरों में अनुशासन होता है, जिनके घरों में छोटे-बडे का लिहाज किया जाता है, जिनके घरों में अनैतिक कार्य नहीं होते, उनके घरों के बच्चे ही सुशील, सभ्य और अनुशासनप्रिय होते हैं। जिन बच्चों में ये गुण होंगे, निश्चित ही वें व्यवहारकुशल भी होंगे।

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