अनमोल वचन

अनमोल वचन

दूसरों की अच्छाईयों को ग्रहण करने और अपने भीतर की बुराईयों को परखकर उन्हें दूर करने का प्रयास करना मनुष्य का सर्वश्रेष्ठ गुण है। दूसरों में सद्गुण और अच्छाईयां देखने से अपने सद्गुणों का विकास होता है। हर इन्सान में चाहे बुराईयां जितनी भी हो, कोई न कोई सद्गुण अवश्य होता है। किसी में सच्चाई अधिक होती है, कोई जी तोड परिश्रम करता है, कोई अच्छा कलाकार होता है, कोई साहसी होता है, कोई दानी है तो किसी में चरित्र बल अधिक है। कुछ सज्जन लोग ऐसे भी मिलेंगे, जो हर प्रकार से सम्पन्न हैं, परन्तु अहंकार उन्हें छू तक नहीं पाया, यह भी बहुत बडा गुण है। इस प्रकार हर व्यक्ति किसी न किसी गुण का स्वामी होता है। इन गुणों को हमें अपनी पारखी नजरों से अवश्य परखना चाहिए और हमें भी वैसा ही गुण अपने में पैदा करने का प्रयास करते रहना चाहिए। स्वयं के व्यक्तित्व को श्रेष्ठ से श्रेष्ठतर बनाने की यही पद्धति है। छिद्रान्वेषण के स्वाभाव को त्यागकर अपने अन्दर उदारता, दूरदर्शिता, सहनशीलता जैसे सद्गुणों के विकास का प्रयास निरंतर करते रहना चाहिए।

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