अनमोल वचन

अनमोल वचन

श्रम के महत्व को सारी दुनिया जानती है, श्रमशील और पुरूषार्थी व्यक्ति को हर समाज में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। श्रम हमें अहसास कराता है कि धरती पर हम जीवित प्राणी हैं। जो श्रम नहीं करता, उसमें और मुर्दे में कोई अन्तर नहीं। जिस दिन व्यक्ति पूरे दिन श्रम करता है, उस दिन शाम को वह गौरवान्वित महसूस करता है। उसका स्वयं से परिचय होता है। श्रम चाहे छोटा हो या बडा, दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। हम अमुक-अमुक कार्य करेंगे, तो हमारा श्रम सार्थक होगा, ऐसा विचार न कर हमारा जीवन हमारे समक्ष जो भी परिस्थितियां, चुनौतियां प्रस्तुत करे, उनसे घबराकर श्रम करने में पीछे नहीं हटना चाहिए। ऐसा करने पर ही हमारी उन्नति का द्वार खुलता है। श्रम ऐसी कुदाल है, जिसके माध्यम से हम अपने व्यक्तित्व की विभूतियों को अपने भीतर से निकाल सकते हैं, ताकि उनका सदुपयोग किया जा सके। एक सहज प्रश्न उठता है कि श्रम तो कृषि में पशु भी करते हैं, परन्तु उन्हें कहां हीरे मोती मिलते हैं। कारण यह है कि पशु के श्रम के साथ भावना और मनायोग नहीं जुडते, बुद्धि और विवेक नहीं जुडता, परन्तु मनुष्य के श्रम के साथ जुडता है। श्रम तब और भी अधिक आध्यात्मिक और व्यापक बन जाता है और व्यक्तित्व की प्रगति के द्वार खोलता है, जब श्रम सेवा में परिवर्तित हो जाता है।

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