अनमोल वचन

अनमोल वचन

मनुष्य का जीवन प्रत्यक्ष कल्पवृक्ष है। इसे जानने-समझने के अतिरिक्त अन्य कुछ जानने की आवश्यकता नहीं है। प्राय: हमसे जो अत्याधिक निकट होता है अथवा अत्याधिक दूर, उसकी हम उपेक्षा कर देते हैं। हमारा जीवन हमसे अत्याधिक निकट है, यही कारण है वह हमसे उपेक्षित होता है। इसे हम जानने-समझने का प्रयास ही नहीं करते। इसके लिये हम थोडा समय भी नहीं निकाल पाते। इसे समझने के लिये प्रभु उपासना के साथ आत्मबोध का प्रयास करना होगा। थोडा समय निकालकर अपने बारे में भी सोचें कि हम क्या हैं? हम ऐसे क्यों हैं? हम क्या कर सकते हैं, हमारे भीतर क्या-क्या संभावनाएं हैं, उन्हें किस प्रकार निखारना है। इन सवालों का उत्तर पाने के लिये एक आदर्श व्यवस्था है, जिसमें चार बातें हैं श्रम, सेवा, सदाचार और स्वाध्याय। श्रम से हमें अनुभूति होती है कि हम जीवित हैं। श्रमहीन व्यक्ति मृत समान है, इसलिए श्रम महत्वपूर्ण है। कहा गया है कि सेवा में ही मेवा है। थोडी सेवा किसी की करके देखिये, आप स्वयं को कितना गौरवान्वित महसूस करेंगे। सदाचार से तात्पर्य है सद्-आचरण अर्थात आपका व्यवहार सत्य पर आधारित हो। जीवन के यथार्थ को जानने के लिये महापुरूषों के अनुभव उनके द्वारा रचित ग्रंथों तथा धार्मिक पुस्तकों का स्वाध्याय ये आपको जीवन के यथार्थ का दिग्दर्शन करा देंगे।

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