अनमोल वचन

अनमोल वचन

मनुष्य अपने जीवन में उच्चता की ओर बढना तब आरम्भ करता है, जब उसके विचार सुदृढ और संकल्प श्रेष्ठ होते हैं। जब उसे यह समझ में आ जाये कि संसार में जो कुछ भी है, सब ईश्वर का है, अपना कुछ नहीं, इसलिए जो करना है, वह मानवता की सेवा और रक्षा के लिये करना है। शोषण और सेवा, आसक्ति और विरक्ति, स्वार्थ और परहित दोनों के धरातल पर अपने व्यक्तित्व से अलग हटकर जिस किसी ने भी मानवता के लिये, राष्ट्रहित के लिये अपना अस्तित्व मिटाकर काम किया है, वह सदैव महान बना है। युगो तक ऐसे महान लोगों को पूजा जाता है। आप और हम लम्बे समय तक वर्तमान स्वरूप में रहने वाले नहीं हैं। संसार का कोई भी पदार्थ टिकाऊ नहीं और प्रकृति के इन्हीं तत्वों से हमारे शरीर की रचना हुई है, इसलिए हम भी टिकाऊ नहीं हैं। यह मानव शरीर परमात्मा का दिया हुआ एक अनुदान है। कुछ पल के लिये प्रकृति पुन: उसे अपने में समेटकर विलय कर लेती है और आपके कर्मों के आधार पर नूतन शरीर की रचना करती है। आपका किया हुआ कर्म पुन: उसे प्राप्त करने में समर्थ हो जाता है। नूतन का निर्माण कैसा हो, उसके लिये आपके कर्म ही उत्तरदायी होते हैं। नूतन वर्तमान से बेहतर हो, इसके लिये हमारे वर्तमान कर्म श्रेष्ठकर होने चाहिए। वे कर्म निश्चित ही परहित और सेवा के कर्म ही हैं।

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