अनमोल वचन

अनमोल वचन

एक जमाने में ईमानदार और सत्यनिष्ठ व्यक्ति को समाज में आदर मिलता था और आज ईमानदार और सिद्धांतवादी को पागल की संज्ञा दी जाती है। सम्मान किये जाने के बजाय उसका उपहास उडाया जाने लगा है। उसे समाज में बोझ माना जाने लगा है, जबकि बेईमानों को यश, प्रतिष्ठा तथा समृद्धि प्राप्त है। वर्तमान परिपेक्ष्य में जीवन का शायद ही कोई क्षेत्र बचा हो, जहां लेशमात्र ईमानदारी और निष्ठा जिंदा हो, चाहे क्षेत्र व्यापार उद्योग का हो, विधायिका हो, कार्यपालिका हो, यहां तक कि न्यायपालिका में भी शुचिता का हृास हो चुका है। कभी कहा जाता था कि मेहनत और ईमानदारी के बल पर सफलता और उन्नति प्राप्त हो सकती है, परन्तु आज स्थिति बदल गई है, इनका स्थान ‘जुगाड’ ने ले लिया है। आज अंधाधुंध ऋण लेकर कार, सम्पत्ति, इलेक्ट्रोनिक उपकरण आदि लेने वाले मध्यम वर्ग की दुर्दशा का कारण ही यह है कि उसे केवल आज की चिंता है। रही सही कमी समाज में दिखावे की प्रवृत्ति ने पूर्ण कर दी है। शास्त्रों में उल्लेख है ‘जब अर्थ को धर्म एवं नीति से अधिक महत्व दिया जाता है, तो वह दुखदायी सिद्ध होता है। कमोबेश आज इसी प्रकार की स्थिति का हम सामना कर रहे हैं। वर्तमान परिपेक्ष्य में हमारे पास संस्कृति के नाम पर रह ही क्या गया है?

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