अनमोल वचन

अनमोल वचन

दान महत्वपूर्ण है, परन्तु उससे अधिक दान की पवित्र भावनाओं का। दान करने से आध्यात्मिक और सामाजिक लाभ तो होता ही है, उसका व्यक्तिगत जीवन में भी बहुत बडा लाभ है। दान करने से वस्तुओं के मोह का त्याग होता है। जब व्यक्ति किसी भौतिक वस्तु को अनजान लोगों को यूं ही दे देता है, तो उसके मन में विशेष बात यह आती है कि जिसे वह जानता तक नहीं था, उसकी सहायता कर रहा है, तो अपने परिवार में माता-पिता, भाई-बहन की सहायता क्यों न करे। इस प्रकार यदि वह यह गलती कर रहा हो तो वह अपनी त्रुटि सुधार लेता है। दान से मन बडा होता है। किंचित अनुमान लगायें कि हमारे पास पर्याप्त धन है, फिर भी परिवार के लोग थोडी सी सामग्री के लिये परेशान हो रहे हैं, पीडा का जीवन जी रहे हैं। आखिर मेरे ऐसे धन से क्या लाभ। हां दान देते समय मन में उदारता अवश्य होनी चाहिए। दान ऐसा हो कि दाया हाथ दान करे तो बायें हाथ को पता न लगे। किसी की आवश्यकता समझकर मांगे बगैर सहायता सर्वोत्तम, मांगने पर दान मध्यम और मांगने पर अपमानित कर और कडवे शब्द बोलकर किया गया दान या सहायता अधम और निम्न कोटि की श्रेणी में आती है। आखिर सूरज-चांद, पेड-पौधे, नदी-झरने प्राणी मात्र को बिना मांगे ही तो दे रहे हैं, तभी तो अनादि काल से इनकी महत्ता धार्मिक ग्रंथों में वर्णित की गई है।

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