अनमोल वचन

अनमोल वचन

संसार के महापुरूषों ने ‘सादा जीवन उच्च विचार’ के आदर्श को स्वीकार किया है। उसी के बल पर वे उत्थान पथ की ओर अग्रसर हुए हैं। व्यक्तिगत जीवन में अभाव, निर्धनता और गरीबी, सुख-शांति को नष्ट न कर सके, इसके लिये जरूरी है हम अपनी आवश्यकताओं को उतनी ही सीमित रखें, जिन्हें हम अपनी सीमित आय में पूरी कर सकें। सादगी मात्र व्यक्तिगत जीवन में ही उपयोगी नहीं है, अपितु सामाजिक सुव्यवस्था के लिये भी महत्वपूर्ण है। सादगी से जीवन यापन करने वाले समाज के विकास में भी योगदान दे सकते हैं। अनेक महापुरूष इसके उदाहरण हैं। समूची यूनानी सभ्यता को लोग आज सुकरात और अरस्तु के कारण जानते हैं। सादगी पसंद महात्मा गांधी, महामना मालवीय, विनोबा भावे, सरदार पटेल, गुरू गोलवरकर ने मनोयोग से राष्ट्र की सेवा की। सादगी वस्तुओं तथा साधनों के उपयोग से नहीं रोकती, वह तो केवल दृष्टिकोण बदलती है। मन समय-समय पर भिन्न-भिन्न वस्तुओं की मांग करता है। मनोरथों की कोई अंतिम सीमा नहीं होती। महापुरूषों ने साधनों के अभाव में भी सादगी को अपनाकर मानवीय सभ्यता को शिखर पर लाकर प्रतिष्ठित किया। सादगी सभी के लिये लाभकारी और महत्वपूर्ण है।

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