अनमोल वचन

अनमोल वचन

व्यक्ति में अच्छे गुण और स्वाभाव में श्रेष्ठताएं अच्छे गुण प्राप्त करने की दृढ इच्छा शक्ति और निरन्तर अभ्यास से ही विकसित होते हैं। क्रोधी स्वाभाव है तो उसे आप तत्काल नियंत्रित करने में असफल हो जायेंगे। उसके लिये आपको उसे नियंत्रित करने के लिये निरंतर अभ्यास करना होगा, इसलिए स्वाभाव में श्रेष्ठताएं प्राप्त करने का अभ्यास भावुकता अथवा दूसरों का अन्धानुकरण पर आधारित न हो, अन्यथा अधिक समय तक उस स्वाभाव को बनाये रखना आपके लिये सम्भव ही नहीं होगा। दूसरों को दान करते देख आवेश में आपमें भी दान करने की इच्छा जागृत हुई, आपने भी कुछ दान किया और वह आपकी हैसियत में नहीं है, तो आप बाद में पश्चाताप के शिकार हो सकते हैं, इसलिए दान, सेवा, भक्ति और अन्य शुभ और पुण्य कर्म अपनी स्थिति को ध्यान में रखकर करें। विपरीत स्थिति और शक्ति से बढकर किये गये प्रयास प्राय: निष्फल हो जाते हैं या फिर आपका साहस इतना बुलन्द हो कि प्रत्येक स्थिति को अंत तक सहन करने की क्षमता आप में हो। इससे अच्छा यही है कि अपनी सामथ्र्य को ध्यान में रखकर ऐसे गुणों का क्रमवार विकास करें। सामान्य व्यक्ति के लिये तो अच्छे गुणों को धारण करने का सीधा सच्चा उपाय है कि वैर भाव, ईष्र्या, द्वेष, क्रोध और प्रतिशोध की भावना को अपने भीतर से समाप्त करने का निरन्तर प्रयास करें। सबके साथ प्रेम, दया, करूणा और सहृदयता से रहकर ही परमपद की प्राप्ति सम्भव है।

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