अनमोल वचन

अनमोल वचन

सच्चे सन्यासी और सच्चे साधु भ्रमित समाज को सही दिशा देने वाले होते हैं। सच्चे अर्थों में मानव समाज उन्हें आध्यात्मिक गुरू के रूप में देखते हैं। कभी-कभी तो उनके विषय में हमारी धारणा देवत्व के समान गुणों को धारण करने वाले की बन जाती है। साधु हो तो वह ब्रह्मचारी हो, कामनाओं से रहित हो, जिसका अपनी इन्द्रियों पर पूर्ण नियंत्रण हो, वह द्वेष, ईष्र्या, क्रोध, लोभ और हठ जैसी मानवीय दुर्बलताओं से परे हो, किसी के कष्ट का कारण न बने, बल्कि दुखियों का तारण द्वार हो। सच्चाई तो यही है कि ऐसे गुणों से सम्पन्न को ही सच्चा साधु या सन्यासी कहा जा सकता है अन्यथा गेरूए वस्त्रधारी की तो यहां कोई कमी नहीं, जबकि आज का जिज्ञासु मानव मन साधु वेश के बाहरी आवरण के भीतर कुछ और खोजना चाहता है। साधु हमें उसी रूप में स्वीकार है, जिसमें साधुत्व भरा हो। साधु के विषय में कबीर दास ने कहा है कि मन न रंगाए, रंगाये जोगी कपडा अर्थात हे साधु तुम अपने मन को प्रभु के रंग में रंग लो अपने कपडे को रंगने से क्या लाभ?

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