अनमोल वचन

अनमोल वचन

किसी के बाहरी स्वरूप को देखकर उसके बारे में कुछ कहना अथवा उसके व्यक्तित्व का आकंलन करना ठीक नहीं है। हमें उसका जो बाहरी स्वरूप दीख रहा है वह वास्तविक नहीं। उसके व्यवहार में आने के पश्चात ही उसकी वास्तविकता का ज्ञान हो सकेगा। कई बार ऐसा होता है कि कुछ व्यक्ति सूरत-शक्ल से बडे आकर्षक होते हैं, बातें भी बडे ऊंचे आदर्शों की करते हैं, परन्तु जब उनके साथ व्यवहार किया जाता है तो वे परले सिरे के मक्कार पाये जाते हैं। हम यदि किसी के चरित्र के बारे में जानना चाहते हैं तो मात्र उसके चेहरे को देखकर अथवा उसकी बातें सुनकर क्या जान पायेंगे। बनावटी चेहरे और बनावटी बातों से यदि हम उसके चरित्र का मूल्यांकन करेंगे तो हम धोखा ही खायेंगे। बाहरी सुन्दरता उसके अन्दर की सुन्दरता की गारंटी कदापि नहीं। बाहर से हमें जो दिख रहा है वह बनावटी है, एक ओढ़ा हुआ आवरण है। जैसा वस्त्र आप पहन लोगे, बाहरी दिखावा तो उसके अनुरूप दीखेगा, परन्तु भीतर का व्यक्तित्व उसका कैसा है यह तो बर्ताव के बाद ही पता चलेगा इसलिए किसी के बारे में अपनी सम्मति देने में कभी भी जल्दबाजी न दिखायें। उसे देखें, परखे तभी उसके सम्पूर्ण व्यक्तिव की जानकारी हो पायेगी। हम भावुकता में बहकर अथवा किसी त्वरित लाभ के लिए किसी के बारे में अपनी राय बना लेते हैं और फिर धोखा खाने को बाध्य हो जाते हैं।

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