अनमोल वचन

अनमोल वचन

किसी कवि ने बड़ी सुन्दर बात कही है ‘पूत कपूत तो क्यों धन संचय, पूत सपूत तो क्यों धन संचय अर्थात यदि आपका पुत्र कुपुत्र है तो उसके लिए क्यों धन का संचय किया जाये, क्योंकि वह तो आपके कमाये धन को व्यसनों में नष्ट कर देगा और प्रचुर मात्रा में धन मिलने के बाद भी अभाव का जीवन ही व्यतीत करेगा और यदि पुत्र सुपुत्र है, अर्थात सद्बुद्धि वाला है तो वह अपने बुद्धि बल से स्वयं धन अर्जित कर लेगा। उसके पास धन कम भी हो तो भी वह सुखमय जीवन व्यतीत कर लेगा। सद्बुद्धि से बढ़कर इस संसार में कुछ नहीं है। सद्बुद्धि से मन मस्तिष्क पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है। मनुष्य के विचारों में संतुलन और स्थिरता आती है। इसके साथ ही उसके धैर्य, चिंतन, मनन और संकल्प की शक्ति बढती है। जिसकी बुद्धि दोषरहित है वह मनुष्य सदा ही पवित्र और शुभ कार्य करता हुआ जीवन में महान आनन्द प्राप्त करता है। सद्बुद्धि वाला इंसान कठिन परिस्थितियों में भी सहजता से बाहर निकल आता है। किसी भी इंसान में सद्बुद्धि उसके द्वारा चीजों को देखने और समझने के सही दृष्टिकोण से विकसित होती है, जो व्यक्ति दूसरों में केवल दोष देखता है या फिर दूसरों की निंदा करता है तो धीरे-धीरे ये बातें उसके भीतर ही प्रवेश कर जाती है। उसके भीतर नकारात्मकता इस प्रकार घर कर जाती है कि उसे अपने आसपास कुछ भी अच्छा नहीं लगता। स्वर्ग नरक कहीं और नहीं इसी धरती पर है। अंतर केवल इतना सा है कि सद्बुद्धि स्वर्ग का अहसास कराती है और दुर्बुद्धि नरक का।

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