अनमोल वचन

अनमोल वचन

सादा जीवन उच्च विचार भारतीय संस्कृति का आधार रहा है, परन्तु आज पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव ने हम पर कुछ ऐसा रंग जमाया है कि हम अपनी प्राचीन संस्कृति और आचार-विचारों को भूलते जा रहे हैं। अपनी आवश्यकताएं इतनी बढा चुके हैं कि उन्हें पूरा करने के लिये जी-तोड परिश्रम करने के बाद भी हम जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। जब हमारी जरूरतें पूरी नहीं होती तो हम तनावग्रस्त हो जाते हैं, रोग हमें घेर लेते हैं। पुरातन काल में ऋषि, महर्षि, संत जंगलों में रहकर अपनी जरूरतों को न के बराबर रखकर तपस्या किया करते थे और बडे-बडे राजा महाराजा उन्हें सम्मान दिया करते थे, परन्तु आज के महात्माओं ने भी अपनी जीवन शैली बदल ली है। वे भी भौतिकता की गिरफ्त में आ गये हैं। महाभारत काल में विदुर ने मंत्री रहते हुए भी सादगी से जीवन व्यतीत किया, चाणक्य भी कुटिया में रहते थे। समाज के बडे लोग जैसा करेंगे, आम आदमी उनका ही अनुसरण करेगा। इसलिए उनकी जिम्मेदारी सबसे अधिक है। उन्हें सादगी अपनाकर समाज के लिये उदाहरण बनना चाहिए। निश्चित रूप से विवेकपूर्ण विधि से अपनाई गई सादगी मानवी सभ्यता को और आगे बढाने में समर्थ है। हम सादगी अपनाकर अनावश्यक जरूरतों को कम करके उसी ऊर्जा को मानव सभ्यता के विकास में लगायें तो अपने साथ समाज का भी भला हो।

Share it
Top