अनमोल वचन

अनमोल वचन

शास्त्रीय वचन है कि जब हम कभी किसी व्यक्ति के जीवन पर प्रतिबंध लगाते हैं या उसकी गति को रोकने का प्रयास करते हैं तो वह विरोध करता है। यदि सरलता से नदी बहती रहे तो हम उसका जैसा चाहें उपयोग कर सकते हैं, परन्तु ज्यों ही उसकी धारा को रोकने का प्रयास करेंगे तो नदी विद्रोह कर उठेगी। उसी प्रकार हवा के वेग को जब हम जबरन रोकने का प्रयास करेंगे तो उसका वेग प्रबल हो जाता है। मनुष्य की शक्ति इनसे भिन्न होती है। मनुष्य या तो क्रियात्मक बनता है या फिर विध्वंसात्मक बनता है। उसके जीवन में यही दो सम्भावनाएं हैं। प्रश्न यह है मनुष्य समाज की विपरीत दिशा में क्यों खडा हो जाता है। उपेक्षा का भाव मनुष्य को सहन नहीं, ऐसे अनेक उदाहरण हैं जो बचपन में बहुत ही साधारण, सरल, कोमल और मोहक थे, परन्तु वे एक दिन समाज के सीने पर खडे हो गये। कहीं ऐसा तो नहीं कि वे हमारी उपेक्षा से तंग आकर विद्रोही बन गये हों। जो बालक कभी ऐसा था कि सभी लोग उसे गोद में उठाकर प्यार करते थे, आखिर क्या कारण है कि आज वही बालक समाज में एक विद्रोह एक आतंक बनकर खडा हो गया। अवश्य ही इसमें कोई भूल हुई है। समाज से, अभिभावकों से अवश्य ही कोई भूल हो गई। भविष्य में ऐसी भूल न हो, इसके लिये अभिभावकों और समाज को भूल के मूल कारणों को जानकर उन्हें दूर करना चाहिए।

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