अनमोल वचन

अनमोल वचन

मनुस्मृति का एक श्लोक है ‘अभिवादन शीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविन चलारि तस्य वर्धन्ते आयु विद्या यशोबलम् अर्थात अपने बडों को नित्य प्रणाम एवं सेवा करने वाले मनुष्य की चार चीजें बढती हैं- आयु, विद्या, यश और बल। तुलसीदास भी कहते हैं ‘प्रात:काल उठि के रघुनाथा, माता-पिता गुरू नमेहि माथा। यह तुलसी ने भगवान राम के लिये लिखा, परन्तु आज की भौतिकवादी सभ्यता और महानगरों में पलते हुए समाज में लोगों की आंखें चुंधिया गई हैं। इस समाज में अब माता-पिता, बुजुर्ग सामान की भांति पुरानी वस्तु बनकर रह गये हैं। पढा-लिखा समाज और उन्नत पद पर आसीन व्यक्ति भी अब माता-पिता को घर के पिछवाडे वाले कमरे में या कहीं इधर-उधर भेजकर उत्सवों और आयाजनों की शान को कम करना नहीं चाहता। लोगों ने तो वृद्धाश्रम तक की राह अपने माता-पिता को दिखा दी है। यह सब एकदम नहीं हुआ और सब घरों में भी ऐसा नहीं होता। यह तो मात्र संयुक्त परिवारों का एकल परिवारों में बदलने का परिणाम है। स्वतंत्र और स्वछंद रहने की चाह ने युवाओं को भ्रमित कर दिया है। परमात्मा इन्हें सद्बुद्धि प्रदान करे।

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