अनमोल वचन

अनमोल वचन

महाभारत में यक्ष द्वारा युधिष्ठिर से किये गये प्रश्नों में दूसरा प्रश्न था कि धरती से भारी और आसमान से ऊंचा क्या? युधिष्ठिर ने धरती से भारी मां की ममता को बताया और आकाश से ऊंचा पिता के अरमान को। पिता के जो अरमान अपने पुत्र के ऊंचा उठने की कामना के लिये किये जाते हैं, वे आकाश की ऊंचाईयों को भी लांघ जाते हैं। धर्मग्रंथ कहते हैं, यदि हमें भगवान को प्रसन्न करना है, तो माता-पिता की पूजा करें। माता का स्थान तो पिता से भी ऊंचा माना गया है। वृहद्धम पुराण में महर्षि वेद व्यास ने माता की महिमा इस प्रकार व्यक्त की है ‘पुत्र के लिये माता का स्थान पिता से बढकर होता है, क्योंकि वह उसे गर्भ में धारण कर चुकी है और शिशु अवस्था में माता के दूध से ही उसका पोषण हुआ है। गंगा के समान कोई तीर्थ नहीं, विष्णु के समान कोई पूजनीय नहीं और माता के समान कोई गुरू नहीं। भार्या के समान कोई मित्र नहीं, पौत्र के समान कोई प्यारा नहीं, बहन के समान कोई सम्मानीय नहीं और मां के समान कोई गुरू नहीं। पत्तों में तुलसी का पत्ता सबसे श्रेष्ठ और गुरूओं में माता ही सर्वश्रेष्ठ गुरू है। इस प्रकार माता को सर्वश्रेष्ठ गुरू का स्थान देने में उसकी बार-बार पुनरावृत्ति की गई है।

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