अनमोल वचन

अनमोल वचन

ज्ञानियों का यह कथन अक्षरश: सत्य है कि जैसा खाये अन्न, वैसा हो जाये मन। जिस प्रकार का भोजन व्यक्ति करता है, उसी भोजन की प्रवृति के अनुरूप आदमी के मन की प्रवृति हो जाती है। इसलिए मन को पवित्र करने तथा पवित्र रखने के लिये निर्मल, शुद्ध तथा कोमल बनाने के लिये सतोगुणी भोजन करना आवश्यक है। साग-सब्जियां, अनाज, दूध, घी, मक्खन, दही आदि पदार्थ मन में ठंडक पैदा करते हैं, मन को संवेदनशील तथा शुद्ध विचारों वाला बनाते हैं। ये सब पदार्थ सतोगुणी भोजन में आते हैं। सतोगुणी तथा तमोगुणी पदार्थों के सेवन से मन में ताप, क्रोध, अहंकार, मोह, चंचलता, लोभ तथा कामाग्नि आदि बुरे विचार तथा विकार पैदा होते हैं।
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शराब, मांस, अंडा, भांग, धूतरा, तम्बाकू, अफीम जैसे पदार्थ रजोगुणी तथा तमोगुणी कहलाते हैं, जो शरीर के सब ज्ञान तन्तुओं को दुर्बल तथा सुस्त बना देते हैं। ये मन में से संवेदना तथा दया के भाव नष्ट करके रूखापन, निदर्यता तथा कठोरता आदि राक्षसों जैसे अवगुण पैदा करते हैं। अत: मन को शुद्ध तथा पवित्र बनाने तथा बनाये रखने के लिये सात्विक तथा शुद्ध भोजन ही ग्राह्य होना चाहिए।

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