अनमोल वचन

अनमोल वचन

प्रत्येक मनुष्य को अपना कर्तव्य कर्म करते रहना अनिवार्य है। कर्म से भागने वाला कायर होता है। अर्जुन जब युद्ध से भागने लगे तो श्री कृष्ण ने उन्हें कायर तक कह डाला, क्योंकि उस समय उनका कर्म युद्ध करना था। कर्म महत्वपूर्ण है। हाथ का काम कर्म करना है। इसी हाथ से आप किसी पीडित की सेवा कर सकते हैं, इसी हाथ से किसी का गला दबा सकते हो, तो किसी को दुखी, अपंग बना सकते हो। हाथ एक ही है, किन्तु कर्म की प्रवृत्ति और फल भिन्न-भिन्न हैं। आप अपने शरीर से किसी की सेवा कर सकते हो, किसी को सता भी सकते हो। यह शरीर प्रधान नहीं है, जो कर्म हो रहा है, वह प्रधान है। शरीर तो वह करेगा जो शरीर का स्वामी चाहेगा। शरीर से भगवान की वंदना करें, माता-पिता तथा गुरूजनों की सेवा करें अथवा किसी अनुचित स्थान पर जाकर पाप कर्म करें, यह स्वामी पर निर्भर है। यहां शरीर एक है, कर्म अलग-अलग। इस कर्म को कराने वाला मन सारा खेल खेल रहा है। आप मन से बंधे हैं, इसलिए इस मन के जाल में मत फंसो। श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं ‘हे अर्जुन इन्द्रियों का राजा मन है। मन का आदेश पाकर ही इन्द्रियां अपराध करती हैं, इसलिए मन की बात न मानना। तुम मन की बातों से पहले अपनी बुद्धि से पूछ लें कि यह ठीक है या नहीं।

Share it
Share it
Share it
Top