अनमोल वचन

अनमोल वचन

कम होने से कमी का जन्म नहीं होता, अपितु तुलना करने से कमी का जन्म होता है। यदि कम से कमी का जन्म होता तो फकीर को भी कमी की प्रतीति होती, किन्तु कम होते हुए भी तत्ववेत्ता फकीर को कमी की प्रतीति क्यों नहीं होती? क्योंकि वे किसी से भी तुलना नहीं करते, अमीर के पास बहुत कुछ होते हुए, कम न होने पर भी कमी क्यों? इसलिए कि वे समीप वालों से, सम्बन्धियों से प्राय: भोग पदार्थों और धन की तुलना मन ही मन करता रहता है। दूसरों के पुत्र से अपने पुत्र की, दूसरों की पत्नी से अपनी पत्नी की, आय से आय की, मान प्रतिष्ठा से मान प्रतिष्ठा की तुलना करता रहता है। इस प्रकार तुलना करने का स्वाभाव अविवेकी धनी को कमी का दर्शन कराकर गमी से बेचैन रखता है। वास्तव में न्यूनता की प्रतीति ही कमी है। कमी नाम की वस्तु तथा संख्या नहीं, जैसे किसी की आय प्रतिदिन एक सौ रूपये है, किसी की दो सौ रूपये तो किसी की तीन सौ रूपये। जब दो सौ वाला सौ वाले से तुलना करता है तो उसे अपनी आय अधिक लगती है, परन्तु जब वह तीन सौ वाले से तुलना करता है तो कम की प्रतीति होती है। यदि वह किसी से अपनी तुलना न करे तो उसके पास जो भी है, वह कम है न अधिक। जब कम नहीं प्रतीत होगा तो दीनता, हीनता, कमी, गमी का जन्म भी नहीं होगा और जब अधिक की प्रतीति नहीं होगी तो मिथ्या अहंकार का जन्म भी नहीं होगा।

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