अनमोल वचन

अनमोल वचन

धर्म का पालन करना आत्मा की पवित्रता और मन की शांति के लिये आवश्यक है। धार्मिक होना आपका कर्तव्य
है, किन्तु कुछ लोग लोभ के कारण ‘धार्मिक’ बन जाते हैं। यह बात अलग है कि धर्म के नाम पर वे जो करते हैं, वास्तव में वह धर्म के विरूद्ध होता है। वे सोचते हैं कि ऐसा करके स्वर्ग मिलेगा, अप्सरायें मिलेंगी, शराब के चश्मे मिलेंगे, बिना कुछ किये वो सब कुछ मिलेगा, जो वे वहां चाहेंगे। खूब मजा करेंगे, परन्तु सच यह है कि तुम्हारा स्वर्ग कहीं बाहर दूर आसमान में है, यह कोरी कल्पना है। तुम्हारा स्वर्ग कुछ ऐसा नहीं है कि कहीं राह देख रहा है। इसी प्रकार नरक भी कहीं ओर नहीं। स्वर्ग और नरक मात्र कल्पनाएं हैं, स्वर्ग और नरक दोनों आपके भीतर हैं। स्वर्ग भविष्य में नहीं और नरक भविष्य में है। जो कुछ भी है, वह अभी है और यहीं है। जहां तुम जाते हो, अपना स्वर्ग साथ ले जाते हो और अपना नरक भी। तुम्हारी मर्जी नरक में रहना हो तो तुम कहीं भी रहोगे, नरक में रहोगे, स्वर्ग में रहोगे तो भी नरक में रहोगे। ऐसे बुद्धिमान भी यहां हैं, उनको नरक में भी डाल दो तो भी स्वर्ग में ही रहेंगे। उनका स्वर्ग उनके भीतर है, जिस सुख की लालसा में तुम धार्मिक होने की चेष्टा करते हो, वह सुख कहीं और नहीं, तुम्हारे भीतर है, बस उसे पहचानने की आवश्यकता है।

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