अनमोल वचन

अनमोल वचन

‘ऐसी वानी बोलिये मन का आपा खोय, औरन को शीतल करे, आपुहि शीतल होय’ संत कबीर का यह दोहा सर्वकालिक है। व्यष्टिगत और समष्टिगत हर काल और हर स्थान के लिये उपयोगी है। यदि हम एक-दूसरे के साथ बोलवाणी के व्यवहार में इस दोहे के भावों का सम्मान करें, तो संसार के आधे विवादों का स्वत: ही समाधान हो जाये। यदि हम आवेश और क्रोध में कठोर वचन बोलकर दूसरों के हृदय को दुख पहुंचायेंगे तो पाप के भागी तो बनेगे ही, साथ ही पग-पग पर अपने शत्रु भी पैदा कर लेंगे। इससे तो समस्याएं बढेंगी ही, परिवार में, समाज में आपसी मतभेदों में वृद्धि ही होगी। इस प्रकार ही अन्य सभी संतों और मनीषियों ने वाणी के संयम व मधुरता पर बहुत बल दिया है। वाणी के संयम से जहां हमारी सोचने, विचारने की शक्ति बढती है, वहीं इससे हमारी वाणी में ओज की वृद्धि भी होती है और वह दूसरों पर स्वत: ही अपना प्रभाव डालती है। इसके साथ ही वाणी में मधुरता होने पर वह लोगों के हृदय को भी सांत्वना देती है। उनके हृदयों को जीत लेती है। इस प्रकार व्यक्ति यदि अपने सामान्य व्यवहार में वाककला को नया आयाम दे, उसमें सुधार लाये तो उसके ये प्रयास उसके विकास के नये-नये द्वार खोल सकता है। उसके मित्र तो अधिक से अधिक बनेंगे, परन्तु शत्रु कोई नहीं होगा।

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