अनमोल वचन

अनमोल वचन

सारे विश्व की मानव चेतना को जागृत और समृद्ध करने के लिए आज पहले से अधिक वेद आधारित भारतीय संस्कृति की संजीवनी चाहिए। व्यक्ति हो या फिर समाज आज दोनों रूग्ण है। उनके पैर लडखडा गये हैं। जीवन में भटकाव आ गया है। जब दिशा ही बिगडी है तब भला दशा कैसे सुधरेगी। हमारे पास संस्कृति के सुविचार रूप में संजीवनी तो है, परन्तु उसका सम्यक प्रचार नहीं। यदि थोडा बहुत प्रचार है भी तो तदानुकूल समुचित व्यवहार नहीं। यदि किंचित व्यवहार है भी तो उसमें पर्याप्त कौशल नहीं। बात तब बने जब  फिर से भारत देश को केन्द्र बनाकर सांस्कृतिक नवजागरण की अलख जगे। भारत की संस्कृति की सर्वोच्चता का मात्र बखान करने से बात नहीं बनेगी। उसे जीना पडेगा। अपने साथ-साथ औरों के जीवन को उससे सिंचित करना पडेगा। हां यह सत्य है कि आतंकवाद के रूप में हिंसा की आग का आवेग आज प्रचंड है। उसे शांत करने के लिए संस्कृति में निहित संवेदनाओं की भावना की मूसलाधार वृष्टि चाहिए अन्यथा यह शांत होने वाली नहीं। अपने पूर्वजनों के गुणों और आदर्शों का बखान तो आवश्यक है, परन्तु पर्याप्त नहीं। हमें स्वयं उनका सच्चा उत्तराधिकारी और सच्चे अर्थों में उनकी विरासत का अधिकारी सिद्ध करना होगा। तभी सकल विश्व में इस महान संस्कृति की ध्वजा को फहराना सम्भव है।

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