अनमोल वचन

अनमोल वचन

‘भारत की सांस्कृतिक अवधारणाओं का मूल ‘वेद’ है। वेद और उसके प्रर्वतक ऋषियों की जीवन दृष्टि तथा जीवन शैली ईश्वरोन्मुख है। ये जीवन के निरन्तर परिष्कार पर विश्वास रखते हैं। यह व्यक्तव्य किसी भारतीय के द्वारा व्यक्त नहीं अपितु यूरोप के प्रसिद्ध विद्वान मैकडानल का है। वेदों के मनीषी मैक्समूलर जिन्होंने वेदों का जर्मन भाषा में अनुवाद किया का कहना है ‘भारतीय संस्कृति के भावार्थ को समझना सम्पूर्ण मानवता के हित में है। मानव कल्याण हेतु जितने समग्र विचार एवं जीवन की प्रक्रियाएं वेदों में प्राप्त है उतने अन्यत्र कहीं नहीं है। बदलते समय ने मानव जीवन में अनेक परिवर्तन किये हैं। वेशभूषा, जीवन के संसाधन बहुत कुछ बदला है परन्तु दुनियाभर के मनुष्यों के लिए मूलभूत एवं शाश्वत आवश्यकताएं अभी भी वहीं हैं। भारत की संस्कृति में अभी भी इन्हें खोजा जा सकता है। वेद ज्ञान अभी भी सार्वभौमिक है। वर्तमान युग में इसका युग के अनुकूल प्रस्तुतीकरण तथा इसकी व्यापकता पहले से अधिक आवश्यक हो गई है। वेद की व्यापक स्वीकार्य का अर्थ है भारत देश का नवजागरण। भारतीय संस्कृति जो वेदों पर आधारित है आर्य जीवन का निर्माण करती है। आर्य का अर्थ है श्रेष्ठ मनुष्य। दुख इस बात का है कि आज हमने स्वयं अपनी उस संस्कृति को विस्मृत कर दिया है और प्रभु प्रदत्त ज्ञान की इस अमूल्य धरोहर के प्रति उपेक्षा और उदासीनता का भाव दिखाकर अपनी ही हानि कर रहे हैं।

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