अनमोल वचन

अनमोल वचन

महापुरूष सदैव बने नहीं रहते। समय के साथ उनको भी जाना पडता है, किन्तु विचारों, पुस्तकों के रूप में उनकी आत्मा इस धरती पर चिरकाल तक बनी रहती है। जिन्हें लोग कागज के निर्जीव पन्ने समझते हैं, उन महामानवों की आत्मा उन्हीं पन्नों में लिपटी हुई रहती है। उनमें सदैव जीवित रहे लोगों को दीक्षित करने, संस्कारवान बनाने और जीवन पथ पर अग्रसर होने के लिये शक्ति, प्रकाश और प्रेरणाएं देने का सामथ्र्य बना रहता है। स्वाध्याय वस्तुत: आत्मोन्नति का ऐसा ही साधन है, इसलिए विद्याध्ययन से, स्वाध्याय से व्यक्ति को कभी प्रमाद नहीं करना चाहिए। ऋषियों की इस शिक्षा में यही तथ्य सन्निहित है कि व्यक्ति के आत्मिक परिमार्जन की प्रक्रिया उन्हीं महामानवों के विचारों के अध्ययन और उन्हीं के आचरण से सम्पन्न होती है। दीनहीन जीवन को ऊंचा उठाने की शक्ति उसी से मिलती है। इतिहास साक्षी है कि संसार में जितने भी सफल व्यक्ति और महापुरूष हुए हैं, उनको ऊंचे स्तर पर ले जाने वाला यान उन्हीं महामानवों के विचारों और उनके द्वारा रचित किसी न किसी ग्रंथ की प्रेरणा के रूप में ही प्राप्त हुआ है।

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