अनमोल वचन

अनमोल वचन

गीता का कथन है ‘ज्ञान के समान इस संसार में पवित्र और कुछ नहीं। जीवन निर्वाह हेतु अपनाये व्यवसाय की ही भांति हमें सद्ज्ञान के संचय को भी महत्वपूर्ण कार्य मानना चाहिए। ज्ञान वह प्रकाश है, जिसकी छत्रछाया में हम वस्तुओं के यथार्थ से अवगत होते हैं और उनका सही उपयोग करने की स्थिति में होते हैं। आवश्यक नहीं कि इस सम्पदा को अपने चिंतन, अनुभव और मंथन से ही उपार्जित किया जाये। महामानवों द्वारा इसकी मात्रा में सद्ज्ञान छोडा गया है कि उसे बटोरने भर से ही काम चल सकता है, जो उनके द्वारा रचित ग्रंथों में विद्यमान है। इस प्रक्रिया को सद्ग्रंथों का स्वाध्याय कहा जाता है। कन्फ्यूशियस का कथन है ‘रात भर प्रार्थना करने की अपेक्षा एक घंटे का सद्ज्ञान संग्रह अधिक अच्छा है। विचार की कलम और स्याही कम पवित्र नहीं है। दूसरों की कठिनाईयां को हल्की करने के लिये उनके लिये साधन जुटाना ही उदारता नहीं है, वरन् यह भी है कि उनकी समस्याओं का कारण और उनका समाधान बताकर आज और भविष्य में अपने बलबूते त्राण पाने का मार्ग बताया जाये। ज्ञान की उपासना मानवता की सेवा है, जिसके लिये स्वाध्याय का आश्रय अनिवार्य है।

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