अनमोल वचन

अनमोल वचन

कई लोग धर्म, आध्यात्म, मानवता और समाजोत्थान की बडी-बडी बातें करते हैं। बातों में, विचारों में आकाश कुसमो को तोडने में नहीं चूकते, किन्तु धरती पर काम आने वाली छोटी-छोटी बातों पर तनिक भी ध्यान नहीं देते। फलत: वे न जमीन के रहते हैं और न आसमान के। अपना कोई प्रभाव छोडने में भी वे सफल नहीं हो पाते। जिनके वस्त्र अस्त-व्यस्त हों, बाल बिखरे हुए हों, खाने-पीने और बैठने, रहने का कोई ढंग नहीं, जिनकी जीवन पद्धति में कोई व्यवस्था क्रम न हो, उल्टा फूहडपन, भौंडापन टपकता हो, ऐसे व्यक्ति न किन्हीं महत्वपूर्ण कार्यों का सम्पादन ही कर सकते हैं और न किसी क्षेत्र में विशेष सफलता अर्जित कर सकते हैं। कई लोग सही बात को भी बडी कर्कशता और रूखेपन के साथ करते हैं, मानो किसी के साथ लड रहे हो। बातचीत में अपने ही विषय में और अपने ही अनुभवों की भरमार रखना, दूसरों को मौका ही न देना, किसी की बहन-बेटी के सौंदर्य की चर्चा, परनिंदा आदि से मनुष्य का औछापन ही झलकता है। इस प्रकार के आचरण से दूसरों पर अच्छा प्रभाव तो पडता ही नहीं, बल्कि बुरा ही पडता है। किसी भी प्रकार के चारित्रिक, व्यवहारिक दोष मनुष्य को असफलता और पतन की ओर ले जाने वाले हैं। समाज भी ऐसे व्यक्ति को हेय दृष्टि से देखता है, इसलिए इन अवगुणों का त्याग करना और इनसे दूर रहना ही अपने और समाज दोनों के ही हित में हैं।

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