अनमोल वचन

अनमोल वचन

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न देखा कोई, जो मन खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोई। ये भाव यह है कि संसार में दूसरा कोई बुरा नहीं, बुरा तो आपा है। स्वयं में ढूंढोगे तो अनेक अवगुण मिल जायेंगे, इसलिए दूसरों में अवगुण न खोजो। हां अपने अवगुणों को खोजकर उन्हें दूर करने का प्रयास करें, परन्तु आदमी अपनी मानवीय दुर्बलता के कारण दूसरों में बुराईयां और अपनी अच्छाईयों को ही देखता है। अपने छोटे से गुण को ही बढा चढाकर दूसरों के सामने बखान करता है। दूसरों की सुनने को तैयार ही नहीं। भैय्या दूसरों की भी सुनो, हो सकता है कोई काम की बात उसमें मिल जाये। यदि आप दूसरों की सुनने में दिलचस्पी नहीं लेंगे, उनकी नहीं सुनेंगे तो धीरे-धीरे यही होगा कि वे भी आपकी नहीं सुनेंगे। आप में रूचि लेना छोड देंगे। हितकर यह है कि दूसरों को ध्यान से सुनें, उन्हें अधिक अवसर दें, आप स्वयं कम बोलें, कोई अप्रिय टिप्पणी न करें। अपनी बात को सादगी, मधुरता और नम्रता के साथ कहें। किसी एक आंख से काने को यदि कहोगे कि भैय्या आपकी आंख कैसे फूटी तो उसे बुरा लगेगा, किन्तु यदि कहोगे कि आंख में तकलीफ कैसे हुई, क्या कुछ उपाय इसके ठीक होने का है। इस कार्य में में आपकी क्या सहायता कर सकता हूं। आपके सहानुभूति के दो शब्द कदाचित उसे कुछ राहत पहुंचायेंगे।

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