अनमोल वचन

अनमोल वचन

लोक व्यवहार में हम बहुधा एक-दूसरे की बुराई करते। दूसरों में छिद्र देखने में अधिक रूचि लेते हैं, परन्तु हम अपनी बुराईयों की अनदेखी करते हैं। वास्तव में दूसरों में बुराई देखने की कोशिश भी एक बुराई ही है। इसी प्रकार दूसरों के दुख में सुख प्राप्त करना भी एक बुराई है। यदि हम दूसरों की बुराई और निंदा में लगाया समय आत्म विश्लेषण में लगायें और अपनी बुराईयों को दूर करके, अपने आत्मविश्वास में वृद्धि करने में लगायें तो अधिक हितकर होगा। यह सब केवल अपने विचारों में परिवर्तन लाने से ही सम्भव है। बुराई ढूंढने की अपेक्षा दूसरों के गुणों को गिनने का स्वाभाव बनायें, क्योंकि सभी में यदि कुछ दोष हैं तो उनमें कुछ गुण भी तो होते हैं। एक विचारक का कहना है कि आप एक काम कीजिए, अपने मित्रों और परिचितों की एक सूचि बनायें, उनमें उनके नाम के आगे उनके गुण लिखिये, केवल गुण और अच्छाईयां। इस प्रकार आप देखेंगे कि उन लोगों में कई गुण ऐसे हैं, जो आप में नहीं है। उन गुणों को स्वयं धारण करने का प्रयास करें। धीरे-धीरे आप देखेंगे कि आप सुधर रहे हैं, आप गुणों की खान बनते जा रहे हैं, आप एक श्रेष्ठ मानव बनने की राह पर चल पडे हैं।

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