अनमोल वचन

अनमोल वचन

संसार एक दर्पण है। इस पर हमारे विचारों की छाया जैसी पडेगी, वैसा ही प्रतिबिंब दिखाई देगा। विचार के आधार पर ही संसार सुखमय अथवा दुखमय अनुभव होता है। उत्कृष्ट विचार जीवन को ऊपर उठाते हैं। उन्नति, सफलता, महानता का पथ प्रशस्त करते हैं, जबकि हीन, निम्नगामी, कुत्सित विचार जीवन को गिराते हैं। प्रत्येक विचार आत्मा और बुद्धि के संसर्ग से पैदा होता है। बुद्धि उसका आकार-प्रकार निर्धारित करती है और आत्मा उसमें चेतना फूंकती है। मनुष्य के विचार एक प्रकार की सजीव तरंगे हैं, जो जीवन संसार और यहां के पदार्थों को प्रेरणा देती रहती है। इन सजीव विचारों का जब केन्द्रीयकरण हो जाता है, तो एक प्रचंड शक्ति का उद्भव होता है। स्वामी विवेकानंद का कथन है ‘कोई व्यक्ति भले ही किसी गुफा में जाकर विचार करे और विचार करते-करते वह मर भी जाये तो भी वे विचार कुछ समय उपरांत गुफा की दीवारों का विच्छेदन कर बाहर निकल पडेंगे और सर्वत्र फैल जायेंगे। वे विचार तब सबको प्रभावित करेंगे। मनुष्य जैसे विचार करता है, उनकी सूक्ष्म तरंगे विश्वाकाश में फैल जाती हैं। समस्वाभाव के पदार्थ एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। इस नियम के अनुसार उन विचारों के अनुकूल अन्य विचार आकर्षित होते हैं। एक ही प्रकार के विचार घनीभूत होकर मानव जीवन में जादू की भांति प्रभाव डालते हैं।

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