अनमोल वचन

अनमोल वचन

कई बार देखने में आता है कि एक सी परिस्थितियों में, एक ही सुख-सुविधा और समृद्धि से युक्त दो व्यक्तियों में भी रहने-सहने, व्यवहार करने में असाधारण अन्तर पाया जाता है। जानते हो क्यों? क्योंकि जीने की कला सब नहीं जानते। जीने का अन्दाज सबका अलग-अलग है। जीने के अन्दाज में जो विभिन्नताएं और विचित्रताएं पाई जाती हैं, वह उनके विचारों का प्रतिनिधित्व करती है। सारा संसार मनुष्य के विचारों की ही छाया है। किसी के लिये संसार स्वर्ग है तो किसी के लिये नरक। किसी के लिये संसार अशांति, क्लेश, पीडा आदि का आगार है, तो किसी के लिये सुख-सुविधा, सम्पन्न, उपवन। एक जीवन में प्रतिक्षण सुख-सुविधा, प्रसन्नता, खुशी, शांति, संतोष अनुभव करता है, तो दूसरा पीडा, शोक, क्लेशमय जीवन बिताता है। इतना ही नहीं, कई व्यक्ति कठिनाईयों तथा अभावों का जीवन बिताते हुए भी प्रसन्न रहते हैं, तो कई समृद्ध होकर भी जीवन को नारकीय यंत्रणा समझते हैं। एक व्यक्ति अपनी परिस्थितियों में संतुष्ट रहकर जीवन के लिये भगवान को धन्यवाद देता है, तो दूसरा अनेक सुख-सुविधाएं पाकर भी असंतुष्ट रहता है, दूसरों को कोसता है, महज अपने विचारों के कारण। जीवन में सुख-शांति, प्रसन्नता अथवा दुख, क्लेश, अशांति, पश्चाताप आदि का आचार मनुष्य के अपने विचार हैं, अन्य कोई नहीं।

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