अनमोल वचन

अनमोल वचन

गीता द्वारा दी गई शिक्षाओं में कर्मयोग को अधिक महत्व दिया गया है। गीता के कर्मयोग का तात्पर्य यही है कि हम अपनी प्रसन्नता, कर्तव्य पारायणता एवं प्रयत्नशीलता पर ही निर्भर रहें। जो कुछ करें, उच्च आदर्शों से प्रेरित होकर करें, ताकि अपने द्वारा किये गये कार्यों से हमें संतोष मिले कि एक ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ और पुरूषार्थी व्यक्ति को जो करना चाहिए, वह हमने पूरे मनोयोग के साथ किया। सफलता असफलता की अधिक चिंता किये बिना अपने कर्तव्य पालन में डटे रहें। इस मार्ग पर चलकर बहुत कुछ सहना पडा, परन्तु विचलित नहीं हुए। हम कोई भी कार्य करें, लक्ष्य सरल हो अथवा कठिन, यह जरूरी नहीं कि सफलता हमें पहले प्रयास में ही मिल जायेगी। कभी-कभी सफलता के लिये लम्बे अंतराल तक असफलता का मुंह देखना पड सकता है। एक दार्शनिक का यह कहना हमें सदैव याद रखना चाहिए कि फल की प्रतीक्षा मत करो, उस पर ध्यान भी मत दो, न सफलता के लिये आतुरता दिखाओ, असफलता मिलने पर निराशा हताशा भी व्यक्त न करो। चित्त को शांत और स्वस्थ रखकर अपने कर्तव्यो का एक पुरूषार्थी की भांति पालन करते रहो। विचारणीय यही है कि जब हम अपनी समस्याओं में से अधिकांश को अपना भीतरी सुधार करके अपनी विचार शैली में थोडा परिवर्तन करके हल कर सकते हैं, तो फिर उलझनों भरा जीवन क्यों व्यतीत करें।

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