अनमोल वचन

अनमोल वचन

इसमें कोई संदेह नहीं कि कोई भी व्यक्ति केवल उतनी ही सफलता प्राप्त कर सकता है अथवा उतनी ही उपलब्धियां अर्जित कर सकता है, जितनी वह चाहता है। चाहने को तो लोग न जानें क्या-क्या चाहते हैं, न जानें कितनी आकांक्षाएं पालते हैं, पर वैसा चाहना और बात है तथा उसका फलित होना और बात। लोग चाहते हैं कि उनके पास खूब सम्पत्ति हो, परन्तु दस प्रतिशत भी सच्चे मन से यह नहीं चाहते कि वे सम्पन्न बनें, क्योंकि उन्हें विश्वास ही नहीं होता कि वे भी सम्पन्न बन सकते हैं। पानी में डूबते व्यक्ति को जैसी तीव्र आकांक्षा होती है कि वह बच जाये और डूबने वाला हाथ-पैर मारने लगता है। पूरी शक्ति से पानी की उछाल के साथ संतुलन बैठाने का प्रयत्न करने लगता है और बहुधा वह सफल भी हो जाता है। यही तीव्र आकांक्षा का परिचय है। कोई व्यक्ति दरिद्रता से छुटकारा पाना चाहता है, तो उसे दरिद्रता में वैसी ही घुटन का अनुभव करना चाहिए, जैसा कि डूबने वाला व्यक्ति पानी में डूबने के समय करता है, परन्तु ऐसी घुटन कहां अनुभव होती है, मनुष्य के लिये संसार में कुछ भी अलम्य नहीं है, न ही कोई व्यक्ति किसी प्रकार से अयोग्य है। एक ही अयोग्यता है अपने प्रति अविश्वास, जिसे अपना सही मूल्यांकन करके दूर किया जा सकता है। ऐसा करने में यदि आदमी सफल हो जाये तो आपको कोई लक्ष्य तक पहुंचने से रोक नहीं पायेगा।

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