अनमोल वचन

अनमोल वचन

जीवन को उत्कृष्ट बनाने और बनाये रखने के लिये परमात्मा की उपासना आवश्यक है। चतुर माली जिस प्रकार अपने उद्यान को नित्य निराई-गुडाई, खाद-पानी देकर उसे सजीव और सुन्दर बनाता है, उसी प्रकार आत्मा को उत्कृष्ट बनाने के लिये उपासना का क्रम निरंतर अपेक्षित है। उपासना मन: क्षेत्र को सुविकसित करने की एक वैज्ञानिक विधि व्यवस्था का ही नाम है। आत्मोन्नति चाहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को उपासना को अपने नित्य क्रम में सम्मिलित करना चाहिए। यह नहीं सोचना चाहिए कि हम ईश्वरीय नियमों का पालन कर रहे हैं, फिर अलग से ईश्वरोपासना की क्या आवश्यकता है। लोहार, बढई, मूर्तिकार, शिल्पी अपने श्रम और प्रयोजन में लगे रहते हुए भी यह आवश्यक समझते हैं कि उनके औजारों पर धार लगती रहे। नाई अपने काम में ठीक से लगा रहता है, परन्तु उसे उस्तरा तो बार-बार तेज करना पडता है। मन ही वह औजार है, जिससे क्रिया कलापों को ठीक प्रकार से करते रहना सम्भव है। नित्य का अभ्यास ही मन को किसी महत्वपूर्ण विषय में स्थिरता और प्रसन्नता प्रदान कर सकता है। इसलिए विचारशील व्यक्ति यह स्वीकार कर ले कि निरंतर उपासना समय की बर्बादी नहीं, वरन समय के श्रेष्ठतम सदुपयोग की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।

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