अनमोल वचन

अनमोल वचन

मनुष्य बहुत चतुर है, वह विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण चातुर्य का परिचय देता है। उसकी बुद्धिमता भी प्रशंसनीय है, फिर भी पूर्वाग्रह के कारण वह अपने दृष्टिकोण को सुधारने की आवश्यकता पर समुचित ध्यान नहीं दे पाता। ऐसे में उसकी बुद्धिमता संदेह के घेरे में आ जाती है। यदि वह अपने पुरूषार्थ और बुद्धि के बल पर बडे-बडे महान कार्य कर सकता है, तो अपनी मनोगत और भावनागत त्रुटियों पर विचार क्यों नहीं कर पाता और उन्हें सुधारने के लिये क्यों तैयार नहीं हो पाता। यदि आत्म निरीक्षण करने और अपने दोषों को ढूंढने में उत्साह न हो तो वह कई बार सही निर्णय ले ही  नहीं पाता। जो कुछ हम करते हैं या सोचते हैं, सो सब ठीक है, ऐसा दुराग्रह हो तो फिर न तो अपनी गल्तियों का आभास हो पायेगा और न उन्हें छोड पायेगा। वह अपने पूर्वाग्रही गलत पक्ष का समर्थन करने के लिये तर्क और कारण ढूंढता रहेगा, जिनके आधार पर वह अपने को सही सिद्ध कर सके। अधिकांश व्यक्ति स्वयं को निर्दोष ही मानते हैं। कोई दूसरा व्यक्ति अपनी गलती सुझाये तो मन इस बात के लिये तैयार ही नहीं होता कि वह अपनी गलती स्वीकार करे। यदि यह दोष हटा दिया जाये तो दूसरों की भांति उसे अपनी बुराई भी दखने लग जाये। दूसरों को अपने रास्ते पर लाने की चिंता छोड स्वयं को सुधारने की भी वह चिंता करने लगे तो यह दुनिया को सुधारने के समान ही महान काम हो सकता है। इसीलिये आत्म निरीक्षण और आत्म सुधार ही मनुष्य का प्रथम एवं अनिवार्य कत्र्तव्य है।

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