अनमोल वचन

अनमोल वचन

जब आदमी किसी कष्ट अथवा अभाव में होता है, तो परमात्मा से प्रार्थना करता है। यह सत्य है कि प्रार्थना में बडी शक्ति होती है, जो किसी भी असम्भव दिखने वाली परिस्थिति से हमें बाहर निकालती है। ऐसा नहीं कि भगवान केवल अच्छे लोगों की ही बात सुनता है, बुरों की नहीं, भगवान के यहां अच्छे-बुरे में कोई भेदभाव नहीं। भगवान सभी की सच्ची प्रार्थना को सुनता है, किन्तु भगवान को छलकपट से परहेज है। प्रभु कहते हैं ‘निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहि कपट-छल-छिद्र न भावा। उन्हें तो मात्र निष्कपट और सरल हृदय मनुष्य ही प्रिय है, क्योंकि इन्हीं में भगवान का वास होता है। विश्व के सभी धर्मों में एक मात्र जो समानता है, वह है ‘प्रार्थना’। हर धर्म किसी न किसी रूप में भगवान से प्रार्थना के लिये कहता है, चाहे उसका स्वरूप कोई भी हो। इसीलिये भगवान से जुडने के लिये प्रार्थना को अपने जीवन में अनिवार्य रूप से शामिल करना चाहिए। प्रार्थना भगवान से की गई अन्र्तमन की पुकार है। यह एक ऐसी वार्ता है, जो एकतरफा होती है, परन्तु उसके सकारात्मक परिणाम जीवन में दृष्टिगोचर होते हैं। प्रार्थना भगवान से अपनी इच्छाओं की पूर्ति का माध्यम नहीं है, बल्कि यह तो भगवान के साथ अपनी करूण वेदना की सहभागिता है। जब कभी सहायता और सहारे के सारे द्वार बंद हो जायें, कोई मार्ग न सूझता तो तब प्रार्थना का द्वार खुला रहता है।

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