अनमोल वचन

अनमोल वचन

प्रार्थना एक पुकार है, जिसके माध्यम से हम अपनी भावनाओं को परम पिता परमात्मा के पास भेजते हैं। जब भी मनुष्य किसी संकट में होता है, विपत्तियों से अथवा समस्याओं से घिरा होता है, तो प्रार्थना स्वत: ही उसके अर्न्तमन से निकलती है। संकटों के समय की गई प्रार्थना में दर्द होता है कि उसे इस परिस्थिति से किसी प्रकार बाहर निकाल लिया जाये। केवल कष्टों के समय ही प्रार्थना क्यों? भगवान से प्रार्थना तो सदैव की जानी चाहिए। आत्म कल्याण के लिये, लोक कल्याण के लिये प्रार्थना कभी भी, किसी भी समय की जा सकती है, परन्तु इसमें आवश्यक यह है कि हमारी प्रार्थना की पुकार भगवान तक पहुंचे। हमारे पूर्वज सदा ही प्रतिदिन परमात्मा से लोक कल्याण के लिये प्रार्थनाएं किया करते थे। आज का आदमी कुछ अधिक ही स्वार्थी हो गया है। वह केवल अपने और अपने परिवार के लिये प्रभु से प्रार्थना करता है। इसीलिये उसकी प्रार्थना अधिकांशत: अनसुनी हो जाती है। प्रार्थना आत्मा की गहराई से की जाये। इसमें उपवास बहुत सहायक होता है। उपवास करने से शरीर तथा मन शुद्ध होता है और प्रार्थना करने में मन लगता है। प्रार्थना में रस आता है। इसीलिये उपवासों के मध्य की गई प्रार्थना शीघ्रता के साथ भगवान तक पहुंचती है। भारतीय संस्कृति में उपवासों का बहुत महत्व है। उपवास और व्रत आज भी किये जाते हैं, परन्तु उन्हें ‘अन्नरहित’ भोज्य पदार्थों का प्रयोग कर विकृत कर दिया गया है, जिनसे कोई प्रयोजन सिद्ध ही नहीं होता।

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