अनमोल वचन

अनमोल वचन

मनुष्य बहुधा जीवन में आने वाले कष्टों से शीघ्र घबरा जाता है, किन्तु सामने आई कठिनाईयों और संघर्षों से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि इनका डटकर सामना करना चाहिए, क्योंकि कठिनाईयां हमें निखारने के लिये आती है। हमें कुछ न कुछ अनुभव का उपहार देकर जाती है। भावनाओं में सबसे अधिक उथल-पुथल रिश्तों को निभाने में आती है, इसलिए रिश्तों को विश्वास के धरातल पर परखना चाहिए और तभी आगे बढना चाहिए। जीवन में हम सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों को तो निभाने का प्रयास करते ही हैं, परन्तु सब रिश्तों में सर्वोपरि रिश्ता भगवान से हम सबका है, उसको निभाने का विशेष प्रयास करना चाहिए। अपने मन की हर बात को उसे बताना चाहिए। भगवान से किया गया संवाद जीवन की सारी उलझनों को सुलझाता है। इससे हमारी भावनाओं को संबल मिलता है कि कहीं कोई है, जो हमारा ध्यान रखता है और मुसीबत के समय भी हमें गिरने से बचाता है, संभाल लेता है। भगवान से संवाद करने की कला हमें अवश्य आनी चाहिए। यह संवाद भले ही हमें एकतरफा प्रतीत होता हो, परन्तु ऐसा है नहीं। आत्मा के द्वारा हमें उसका उत्तर भी मिलता रहेगा। इसके साथ-साथ हमें अपने कर्त्वयो का पालन प्रबल पुरूषार्थ से करने से भी पीछे नहीं हटना चाहिए। जिंदगी स्वयं में एक शिक्षक की भांति है, जो हर कदम पर शिक्षण देती है और हमारी भावनाओं के स्वस्थ विकास में हमारी कदम-कदम पर सहायता करती है।

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