अनमोल वचन

अनमोल वचन

सत्य ही जीवन का आधार है, सत्य ही विद्या और जीवन जीने की कला है। वस्तुत: सत्य हमारे हाथों में जलते हुए दीपक की भांति है, जिसके सहारे हम असत्य के अंधेरे को पार कर सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि असत्य ही अज्ञान है, असत्य ही अंधकार है, सत्य के अभाव में ही सारे दुख अपने आप मिट जायेंगे। इसीलिये ‘सत्यमेव जयते’ हमारा सदियों से आदर्श रहा है, मानवीय सभ्यता के इतिहास में न जानें कितने नियम बनाये और बिगाडे गये, पर सृष्टि के आदि में सत्य की जो प्रतिष्ठा थी, वह आज भी उसी रूप में विद्यमान है। आचरण शुद्धि द्वारा नैतिकता के मार्ग को अपनाये रखना ही सत्य है। राम चरित मानस में तुलसी दास जी कहते हैं कि सत्य के समान कोई धर्म नहीं। सत्य सृष्टि का मूल है, सत्य से बडा कोई तप नहीं। सत्य ही पुण्यशाली कर्म और सबसे बडी सिद्धि है। सत्य निष्ठ व्यक्ति दुष्कर्म, अवसाद, अपयश, अशान्ति, असंतोष और अपमान से बचा रहता है। जीवन में उत्कर्ष के लिये सत्य ही सबसे सच्चा मार्ग है। निर्विकार, निर्भय, निश्चित जीवन जीने और परमात्मा की प्राप्ति के लिये इससे बढकर कोई मार्ग नहीं, सत्य बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप, जाके हृदय सत्य हैं, ताकि हृदय आप।

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