अनमोल वचन

अनमोल वचन

एक होती है प्रशंसा, जो सीमा लांघ जाती है तो चापलूसी की संज्ञा में आ जाती है। किसी के अच्छे कार्य की प्रशंसा करना तो अच्छी बात है, परन्तु कुछ स्वार्थी लोग अपने स्वार्थों की पूर्ति के उद्देश्य से अनावश्यक रूप से अत्याधिक प्रशंसा करने लगते हैं। ऐसे चाटुकार लोगों से दूरी बनाये रखना ही श्रेयष्कर है। इसके विपरीत कुछ लोग दूसरों में दोष दर्शन के रोग से पीडित होते हैं, वे दूसरों के अच्छे कार्यों में भी कुछ न कुछ दोष ढूंढ लेते हैं। वे पवित्र से पवित्र व्यक्ति को भी लांछित करने में सिद्धहस्त होते हैं। ऐसे लोग समाज के ‘कोढ’ होते हैं। ऐसे लोगों से भी बचकर रहना चाहिए। जीवन में प्रशंसा और निंदा का वास्तविक महत्व परखें तो ये वास्तव में हमारे लिये मार्गदर्शक का काम भी कर सकती हैं। प्रशंसा से हमें अपने कार्य का मूल्यांकन करने में सहायता मिलती है। प्रशंसा से प्रोत्साहन मिलता है और हम अपने कार्य को और अधिक कुशलतापूर्वक सम्पन्न कर सकते हैं, किन्तु प्राय: ऐसा नहीं होता। हम प्रशंसा के प्रवाह में बहने लगते हैं। हमें लगता है कि हमने कोई महान कार्य किया है। तभी तो लोग हमारी प्रशंसा कर रहे हैं। फलस्वरूप हम भटक जाते हैं और अपना सही मूल्यांकन नहीं कर पाते। सच्चाई यह भी है कि प्रशंसकों या निंदकों का कोई महत्व नहीं होता, किन्तु जो सच्चरित्र और न्यायप्रिय व्यक्ति है, जो ईमानदार है, उनकी निंदा करके उन्हें जीने न देने और अपने पद पर सच्चाई से काम न करने देने को आप क्या कहेंगे, परन्तु आज यह सब हो रहा है और हम सहन कर रहे हैं।

Share it
Top