अनमोल वचन

अनमोल वचन

संसार में सबसे सरल कार्य है दूसरों की निंदा करना। निंदा करना पाप है, अक्षम्य है। इस तथ्य की निदंक अनदेखी कर निंदा रस का आनन्द लेता है, यह बडा अद्भुत है कि लोग मौन रहने वाले की निंदा करते हैं, कम बोलने वाले की निंदा करते हैं, अधिक बोलने वाले की निंदा करते हैं, बुरा करने वाले की निंदा करते हैं, तो परहित में लगे व्यक्ति की भी निंदा करते हैं। उसके परहित के कार्यों में भी उसका कोई स्वार्थ ढूंढने का प्रयास करते हैं। यह भी सत्य है कि संसार में ऐसा कोई नहीं, जिसकी केवल निंदा ही निंदा हो अथवा प्रशंसा ही प्रशंसा हो। लोग सूरज, चांद और सारे जगत के नियंता की भी प्रशंसा और निंदा करते हैं। हमारे जीवन व्यवहार में प्रशंसा और निंदा दोनों का ही प्रयोग होता है। कुछ लोग प्रशंसा करने में इतने कुशल होते हैं कि जिसकी प्रशंसा की जा रही है, वह भी आत्मश्लाघा (खुशफहमी) का शिकार हो जाता है, ऐसे लोग चाटुकार की श्रेणी में आते हैं। कुछ लोगों का काम ही निंदा करना होता है। वे पवित्र से पवित्र व्यक्ति को भी कलंकित करने से बाज नहीं आते। श्रेष्ठ लोगों को यही श्रेयष्कर है कि निंदक की निंदा को आत्म विश्लेषण के लिये लाभकारी मान यदि उनके समीप रहने की बाध्यता हो तो सामीप्य स्वीकार कर लें, किन्तु चाटुकारों से हर दशा में दूरी बनाकर रखें, अन्यथा वे स्वदोष दर्शन कर उन्हें दूर करने का प्रयास कदाचित ही कर पायें।

Share it
Top