अधिक खाने से लोग अधिक पड़ते हैं बीमार..!

अधिक खाने से लोग अधिक पड़ते हैं बीमार..!

 आधुनिक चिकित्सा विज्ञान आयुर्वेद में वर्णित कई बातों को शत प्रतिशत खरा पा रहा है। भोजन की अधिकता एवं कमी पर आयुर्वेद के उल्लेख को भी माडर्न मेडिकल सांइस ने सौ प्रतिशत सही माना है। यह सिद्ध हुआ है कि अधिक खाने से लोग अधिक बीमार पड़ते हैं एवं अधिक रोगों को उसके शरीर में घर बनाने का अवसर मिलता है। ऐसे अधिक खाने वालों की आयु भी कम हो जाती है जबकि कम खाने वाले दीर्घायु होते हैं। लंबी आयु का राज बढ़ती उम्र के साथ भोजन में कमी करना और उसको उपयुक्त पौष्टिक व कम रखना है। आवश्यकता से अधिक भोजन करने पर समस्त शरीरांगों पर अतिरिक्त भार पड़ता है।
बची ऊर्जा व कैलोरी जमा पूंजी की तरह शरीर के विभिन्न भागों में जमा हो जाती है शरीर में चर्बी बढ़ती है। मोटापा एवं वजन बढ़ता है। कमर का घेरा बढ़ता है। रक्त में कोलेस्ट्राल बढ़ता है। ये सब मिलकर कई रोगों को शरीर में निवास करने का मौका देते हैं जब कि कम भोजन करने से शरीर उतने से ही काम चलाना सीख जाता है। उम्र के साथ वैसे भी भोजन को पोषक बनाए रखते हुए उसकी मात्रा में कमी करते जाना चाहिए। 
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पचास-साठ के बाद शरीर को अपने खर्च के लिए बहुत कम मात्रा में भोजन की जरूरत पड़ती है। इस अवस्था में अधिक भोजन की अपेक्षा अपेक्षा भोजन कम मात्रा में करना चाहिए। दो बार जलपान और दो बार भोजन अत्यंत कम मात्रा में करें।
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यह उस उम्र के लिए पर्याप्त होता है। उससे शरीरांगों पर अतिरिक्त भार नहीं पड़ता और न ही रोगों को किसी तरह शरीर में घर बनाने का मौका मिलता है। मेडिकल साइंस कहती है कि कम खाने वाला दीर्घजीवी होता है।
-सीतेश कुमार द्विवेदी

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