अद्भुत विलक्षण शक्ति संपन्न प्राणी जगत

अद्भुत विलक्षण शक्ति संपन्न प्राणी जगत

वियना में एक कुत्ता माल उठाने उतारने के क्रेन के समीप ही पड़ा सुस्ता रहा था। अचानक वह चौंका, उछला और बहुत दूर जा बैठा। वहां पर कार्य करने वाले मजदूर यह सब देखकर दंग रह गये। उनकी समझ में नहीं आया कि आखिर कुत्ता यहां सक उठकर उछलता हुआ दूर जाकर क्यों बैठ गया।इसके कुछ देर बाद ही क्रेन की जंजीर टूटी और एक भारी लौह खंड उस स्थान पर आन गिरा जिस स्थान पर वह कुत्ता बैठा था। संभवत: कुत्ते को इस घटना का पूर्वाभास हो गया था और इसी कारण वह उस स्थान से उठकर दूसरे स्थान पर जा बैठा था।वन्य प्राणियों, पशुपक्षियों में वह क्षमता विद्यमान है जिससे वे न केवल आने वाले संकटों की जानकारी पहले ही प्राप्त कर लेते हैं वरन उसके दुष्प्रभाव से बचने के लिए शोरगुल बंद करके सुरक्षित स्थानों पर चले जाते हैं। परमात्मा ने यदि उन्हें वाणी और भाषा दी होती तो संभवत: वे भविष्यवाणी भी कर सकते थे। मनुष्य की तुलना में पशु-पक्षी भले ही पिछड़े हुए हों परंतु उनकी चेतना मनुष्यों से कहीं अधिक बढ़ी चढ़ी होती है और उसी आधार पर वे अपनी जीवन चर्या को सुविधापूर्वक संपन्न करते हैं। प्रसिद्ध जीवशास्त्री डा.विलियम जे.लाग ने अपनी पुस्तक ‘हाई एनिमल्स टाक’ में प्राणियों के ऐसे प्रसंग लिखे हैं जिससे स्पष्ट होता है कि इन प्राणियों में ऐसी शक्तियां विद्यमान हैं जिन्हें मानवीय भाषा में अतीन्द्रिय क्षमता ही कहा जा सकता है।उपर्युक्त पुस्तक में एक प्रसंग इस प्रकार है- एक मैदान में हिरणों का झुंड बड़ी तेजी से घास चर रहा था जैसे उन्हें कहीं जाने की जल्दी हो। उस समय तो इसका कोई कारण समझ में नहीं आया और कुछ ही घंटों के बाद बर्फानी तूफान आया और कई दिनों तक घास मिलने की संभावना नहीं रही। स्थिति का पूर्वाभास प्राप्त करके हिरण इतनी जल्दी जल्दी घास चर रहे थे कि उससे कई दिन तक गुजर हो सके।उत्तरी कनाडा की झीलों में प्राय: बर्फ जम जाया करती है। झीलों में रहने वाली मछलियां बर्फ जमने से काफी पहले ही गर्म स्थानों पर चली जाया करती हैं। वहां अपनी सुरक्षा कर लेती हैं।
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इसी प्रकार बर्फीले प्रदेशों में में रहने वाले भालू जब बर्फ गिरने को होती है तो काफी समय पहले से ही अपना आहार इक_ा करने लगते हैं और अपनी गुफा में जमा कर लेते हैं। बर्फ गिरने के कारण गुफा का मुंह बंद हो जाने के बाद भालू संचित आहार से अपना काम चलाते हैं।एक अन्य घटना बीसवीं सदी के प्रथम दशक की है। अमेरिका के पश्ंिचमी द्वीप समूह में स्थित पांच हजार फुट ऊंचा एक पर्वत है- माउंट पीरो। अबसे लगभग नब्बे वर्ष पूर्व इसके आसपास कितनी ही बस्तियां थीं जिनमें हजारों लोग रहते थे। पर आज इतने वर्षो बाद भी वहां की आबादी उतनी सघन नहीं हो पायी है जितनी पहले कभी थी, कारण वहां का जीवित ज्वालामुखी है। सन 1904 की बात है। वहां के ग्रामीणों ने अपने साथ रहने वाले पालतू जानवरों तथा अन्य पशु पक्षियों के व्यवहार में असामान्य परिवर्तन देखा। वे प्राय: घबराये से रहने लगे। जो पशु पक्षी मनुष्य के अधीन थे, वे तो कुछ नहीं कर सके पर सांप, कुत्ते और सियार धीरे धीरे माउंट पीरो के आस-पास वाले क्षेत्रों से हटने लगे। लोगों की समझ में नहीं आ रहा था कि अचानक ये प्राणी क्यों इस क्षेत्र से भाग रहे हैं।उसी वर्ष एक दिन मांउट पीरो पर्वत के मध्य एक तीव्र विस्फोट हुआ और लाल लावा पहाड़ के चारों ओर मीलों तक बिखर गया। इस ज्वालामुखी के विस्फोट से करोड़ों की संपत्ति नष्ट हुई और तीस हजार व्यक्ति मारे गये।डा. लाग उक्त घटना का उल्लेख करते हुए लिखते हैं कि ऐसा होना आश्चर्य की बात नहीं है क्योंकि प्राणियों में ऐसी क्षमताएं होती हैं। वे कहते हैं कि उनकी इसी विशेषता के कारण आज जापानी लोग प्राकृतिक आपदा से आत्मरक्षा कर सकने में समर्थ हुए हैं। उनके अनुसार गोल्ड फिश नामक एक मछली होती है जिनमें ऐसी क्षमता उच्च स्तर तक विकसित होती है। ज्वालामुखी विस्फोट अथवा भूकंप जैसी प्राकृतिक विभीषिकाएं जब उक्त क्षेत्र में आने वाली होती हैं तो वह मछली उसकी सूक्ष्म तरंगों को समय से पूर्व पकड़ लेती है जिसका आभास लोगों को उसकी तीव्र बेचैनी और हलचल से मिलने लगता है। तब लोग अनुमान लगा लेते हैं कि अवश्य ही कोई अनहोनी उस स्थान विशेष पर होने वाली है और इस आधार पर अपनी सुरक्षा के उपाय करने लगते हैं। इसी प्रकार ही जीव जंतुओं के व्यवहार में भारी परिवर्तन देखे गये हैं।
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जापान में पाया जाने वाला ‘चीवी’ नाम का पक्षी भूकंप आने से पहले के चौबीस घंटे पूर्व ही अपना स्थान त्यागकर दूरस्थ उड़ जाते हैं। चीन के अनुसंधानकर्ता प्राणी विज्ञानियों ने इस संबंध में अनेकों भूकंपों के पूर्व यह देखा गया कि वहां के पालतू पशु अपने बंधन तोड़कर घरों के बाहर हो जाते हैं। कुत्ते बिल्ली, चूहे आदि जीवों के व्यवहार असामान्य रूप से परिवर्तित हो जाते हैं और पारस्परिक वैमनस्य भूलकर वे साथ-साथ एकांतप्रियता का प्रदर्शन करने लगते हैं।आंधी तूफान आने, बर्फ गिरने या भारी वर्षा होने की शत-प्रतिशत जानकारी उन्नत वैज्ञानिक उपकरणों के माध्यम से मनुष्य अभी तक प्राप्त नहीं कर पाया है जबकि ऊंची पहाडिय़ों में बसने वाले पक्षी बर्फ पडऩे से ठीक एक माह पूर्व ही पहाडिय़ां त्यागकर सुरक्षित स्थानों में चले जाते हैं। पर्यवेक्षकों ने अनेकों प्रयोगों के बाद पाया कि आकस्मिक रूप से पडऩे वाली बर्फ के भी ठीक एक माह पहले पक्षी वह स्थान खाली कर दूर-दराज देशों में चले जाते हैं। इसी तरह तिब्बत और दार्जिलिंग में पायी जाने वाली पहाड़ी सारस वर्षा के दस-पंद्रह मिनट पूर्व ही पर्वतों की गुफाओं अथवा चट्टानों की आड़ में चली जाती है जिसे देखकर तिब्बत के लोग अपना माल असबाब बांध कर वर्षा से बचने का प्रबंध करने लगते हैं। कभी-कभी तो यहां तक देखा गया है कि आकाश में एक भी बादल नहीं है और पानी बरसने के कोई आसार न होते हुए भी जब वह पक्षी छिपने लगे तो उसके कुछ ही समय बाद बादल संघटित हुए और वर्षा होने लगी। -अनुजराम साहू

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