अथ-श्री अन्याय निवारण कथा

अथ-श्री अन्याय निवारण कथा

pushplataसच ने अन्याय के शिकार की व्यथा सुनी और कहा कल सार्वजानिक सभा में मैं यह सवाल उठाऊंगा। उसने न्यायधीश से बात की वह बोला आप सवाल उठायें मैं समर्थन करूँगा आपका सवाल वाजिब है। सवाल प्रसन्न हुआ कल उसे जवाब का लड्डू खाने को मिलेगा 35 साल से भूखा है। न्यायधीश ने कहा वह हमेशा से न्याय का पक्षधर रहा है कल भी रहेगा। सभा शुरू हुई सच ने सोचा आज एक नया सदस्य सभा में आया है सवाल उठाया जाये या नहीं उसे अजीब लगेगा। मगर सवाल की मरणासन्न हालत देख वह रुक नहीं पाया सवाल को खड़ा कर दिया कि ये सवाल 35 साल से भूखा है जैसे-तैसे कुछ लोग इसके प्राण बचाएं हैं क्या हम सब की जिम्मेदारी नहीं इसे नंबर से भोजन पानी दें। झूठ खड़ा हुआ और सवाल की गर्दन पकड़कर ऐंठ दी ताकि लोगों को सवाल का भूखा पूरा चेहरा दिखाई न दे। झूठ का पोषक खड़ा हुआ बोला ये सवाल सभा में आना ही नहीं चाहिए था। इसे गलत लाया गया। अध्यक्ष बोला सवाल अनेक बार सभा में लाया जा चुका है अत: उसको राहत दी जाये। झूठ का पोषक बोला अल्फाबेटिक ली तय कर लो भाई। सवाल ने मन ही मन कहा अबे तू तो पैंतीस साल से मुझे अपने दरवाजे से कुत्ते की तरह खदेड़ रहा है। अध्यक्ष खड़ा हुआ बोला 3० साल का हिसाब निकालता हूँ। झूठ घबराया बोला तीस साल के गड़े मुर्दे क्यों उखाड़ रहा है। अबे तीस साल से क्या मतलब एक साल का निकाल। झूठ के दो पैरोकार खड़े होते हैं जिनमें एक खुद झूठ का पोषक भी है। कहते हैं चलो आज से सवाल के भोजन पानी की जिम्मेदारी हमारी जबकि उनमें से एक ने कल ही सवाल को अपने दरवाजे से खदेड़ा था। न्यायधीश और सभा मौन रहती है। यह जानते हुए भी सच जिस सवाल को लेकर आया है वह वास्तव में अन्याय का शिकार है। अंत में न्यायधीश फैंसला सुनाता है सच का सवाल सुन लिया गया है उस पर कार्यकारणी विचार करेगी। सच का आशय मेरे ख्याल से यह था कि सवाल का भोजन पानी सुचारू रूप से चलना चाहिए। अध्यक्ष झूठ के बदलते तेवर देखकर डरा बोला क्योंकि सभा मेरे घर पर हुई अत: मुझसे या मेरे अलावा किसी अन्य से कोई आप लोगों को बात बुरी लगी हो तो माफी चाहता हूँ। झूठ का पोषक बोला हमारा एक परिवार है हमारे बीच मतभेद है मन भेद नहीं व्यवस्था ऐसे ही थोड़े चल रही है। सच ने सबको खरी-खरी सुनाई घर लौट आया। न्यायधीश को फोन किया पूछा। तुमने वहां मौन धारण क्यों किया। तुम्हें न्याय से ज्यादा इस बात की चिंता रही तुम्हें न्याय के पद से हटा न दिया जाये। वह बोला कहा तो था कार्यकारणी प्रस्ताव पर विचार करेगी। एक अजनबी ने साथ दिया तुम गूंगे का गुड़ खा गए सच ने न्यायधीश से कहा। सच का पैरोकार बोला कोई मेरे मुंह में पानी डालते जाओ मैं खड़ा नहीं हो पा रहा हूँ। अध्यक्ष भी मरी सी आवाज में बोला भाई मेरे सभा से बचे सामान को डब्बे में डालते जाओ चीटियाँ खा जाएँगी मैं भी उठ नहीं पा रहा हूँ क्योंकि उसके घर में कोई नहीं था बीवी मर चुकी बेटी बाहर रहती है वह हार्ट का पेशेंट है। सामान डब्बे में भरने और सच के पैरोकार को पानी पिलाने के बाद सच और न्यायधीश में झगड़ा हुआ और घर लौट गए।
झूठ के पोषक, पैरोकार घर तिलमिलाए पहुंचे बोले आज सच ने सवाल को साथ लाकर सभा का सत्यानाश कर दिया। इतने दिनों से बिना सवाल के व्यवस्था चल रही है। अध्यक्ष के कमरे की कुर्सी पर मुंह बाये बेहोश पड़े सवाल को होश आया उसने पूछा मेरा क्या हुआ। अध्यक्ष बोला भाई अपने घर जा कुछ नहीं हुआ न ये शातिर लोग कुछ होने देंगे अन्य सवालों की तरह तू भी मर जायेगा। तेरी वजह से उल्टा मैं सबका बुरा बन गया। सुबह अख़बार में न्यूज थी सच के सवाल पर कार्यकारणी विचार कर रही है। कार्यकारणी में न्यायधीश उसका सहायक, अध्यक्ष उसका सचिव और झूठ का पोषक और झूठ का पैरोकार पांच व्यक्ति है।
डॉ. पुष्पलता

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