अच्छी नींद पाने हेतु कुछ सुझाव

अच्छी नींद पाने हेतु कुछ सुझाव

डाक्टरों के अनुसार एक स्वस्थ इंसान को 6 से 8 घंटे की नींद की आवश्यकता होती है। जो लोग तीन चार घंटे की नींद लेते हैं, इसका अर्थ है वे किसी मानसिक या शारीरिक समस्या से गुजर रहे हैं। समस्या कोई भी हो, ऐसी स्थिति में डॉक्टर से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।
नींद और मस्तिष्क का गहरा संबंध है। जब चिंता, तनाव या किन्हीं परिस्थितियों से नींद कम या गायब हो जाती है तो इस का प्रभाव मस्तिष्क पर पड़ता है जिसे नींद न आना कहा जाता है। वृद्धावस्था में इंसान शारीरिक श्रम बहुत कम करता है। शरीर के किसी हिस्से में दर्द होने से भी नींद नहीं आती। किसी प्रकार की चिंता भी नींद न आने का मुख्य कारण होती है। शरीर में वायु अधिक बनने से भी बैचेनी रहती है और नींद नहीं आती। किसी प्रकार की शारीरिक बीमारी होने पर डॉक्टर से अवश्य मिलकर उचित इलाज करवायें।
अच्छी नींद हेतु सुझाव:- अधिक देर तक न जागें। 10 से 11 बजे रात्रि तक बिस्तर पर अवश्य चले जायें।
– सोने से पहले मौसम अनुसार ठंडे या गर्म जल से हाथ, मुंह व
पैर अच्छी तरह धोकर बिस्तर पर जायें।
– रात्रि में कपड़े ढीले-ढाले व नर्म पहनें। कसे हुए सख्त वस्त्र भी नींद आने में बाधा पैदा करते हैं।
– सोने वाले कमरे का वातावरण शांत और स्वच्छ रखें। रात्रि में बिस्तर की चादर बदल लें।
– देर रात्रि में टी. वी. , कम्प्यूटर आदि न चलायें। यदि अच्छा संगीत सुनने के शौकीन हैं तो बिस्तर पर आधा घंटा पहले लेट कर धीमी आवाज में संगीत सुनें।
– दिन में शरीर को सक्रि य रखें क्योंकि शरीर और दिमाग थके होने पर अच्छी नींद आती है।
– रात्रि का भोजन हल्का रखें और प्रयास करें कि 8 बजे तक भोजन अवश्य कर लें जिससे सोने और खाने के बीच समय मिल जाता है, भोजन पचाने के लिए।
– सुबह शाम सैर व हल्का व्यायाम नियमित करें।
– सिर पर तेल की मालिश करने से भी नींद अच्छी आती है।
– सोने से पहले पैरों और टांगों पर सूखी मालिश करें ताकि दिन भर खड़े रहने, चलने-फिरने से थकी टांगों की मांसपेशियों को थोड़ा आराम मिले।
– यदि आप भीनी सुगंध से एलर्जिक नहीं हैं तो कमरे में मनभावन परफ्यूम, रूम फ्रेशनर या अगरबत्ती जलाकर कमरे को सुगंधित बना सकते हैं।
– नींद की गोलियों का सेवन मजबूरीवश ही करें। शरीर को इनका गुलाम न बनायें। गोलियों का सेवन डॉक्टरी देखभाल में ही करें।
साथी का भी बी. पी. बढ़ा रहे हैं खर्राटे

भले ही खर्राटे लेकर सोना गहरी नींद अथवा किसी स्वास्थ्यगत खामी के कारण हो किंतु अब यह साथी का बी. पी. बढ़ाने का कारण भी बन रहा है। गलत ढंग से सोने, शारीरिक विसंगति, गहरी नींद अथवा दवाओं के प्रभाव से भी खर्राटे युक्त नींद आती है जो साथी का भी बी. पी. व अन्य बीमारियों को बढ़ाने का कारण बन रही है। एक के खर्राटों के कारण दूसरे की नींद उड़ रही है और बी. पी. बढ़ जा रहा है। रात्रि को मानसिक शान्ति नहीं मिलती जिससे चिड़चिड़ेपने की शिकायत बढ़ रही है, हृदय की बीमारी बढ़ रही है, ंकिडनी प्रभावित हो रही है, अटैक आने की संभावना बढ़ रही है अतएव खर्राटे लेने वाले अपने एवं साथी के स्वास्थ्य के लिए स्वयं संभल जाएं। सोते समय जिनकी खर्राटे आते हैं, वे पीठ के बल न सोकर बायीं या दायीं करवट सोएं। नींद की दवा न लें। गहरी नींद लाने वाली किसी वस्तु का सेवन न करें। नशा भी न करें। फिर भी खर्राटे काबू न हों तो नाक, कान, गला विशेषज्ञ से जांच कराएं और अपने एवं अपने साथी को दीर्घायु बनाएं।
– सीतेश कुमार द्विवेदी

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